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मन उलझा है

मन उलझा है 
अजीब सी उलझनों में 
और तुम भी तो नहीं हो 
कि सिर टिका दूँ, 
तुम्हारे काँधे पर, 
और कस के पकड़ के तुम्हारा हाथ, 
बंद कर लूँ अपनी आँखें 
इस विश्वास के साथ 
कि तुम हो ना 
और तुम रहोगी यूँ ही हमेशा मेरे साथ…