May 09, 2015 चीनी नहीं पीता चाय में आजकल, कुछ यादें घोल लेता हूँ, चाय और सुबह दोनों मीठे हो जाते हैं। Read more
माफ़ी October 21, 2014 कविताओं में ही तुमसे माफ़ी मांग लेता हूँ, डरता हूँ, कहीं तुम ये पढ़ तो नहीं रहीं। Read more
क्यों लिखते हो मुझे October 16, 2014 वो पूछते हैं "अब भी क्यों लिखते हो मुझे?" मैं कहता हूँ, "मेरी कहानियों में वो पूछते तो हैं " Read more
ज़ख्म August 16, 2014 ज़ख्म कुछ गहरे हैं, उन्हें कुछ शब्दों से सी लिया करता हूँ। तुम्हे असल में तो पा ना सका, कहानी-कविता में ही जी लिया करता हूँ। Read more
लहरें July 19, 2014 ज़माने बाद हम फिर मिलेंगे, उसी दरिया के किनारे। और लहरें फिर गवाह होंगी, की इश्क सब कुछ हो सकता है, पर काफी नहीं। Read more
असला July 12, 2014 शायद सच ही कहते हैं। कुछ ज्यादा ही कमज़ोर हो गया हूँ मै। तुम्हारे नाम के नीचे वाली हरी बत्ती देख के आज भी धडकने तेज़ हो जाती हैं, और उसके बुझते ही उतनी ही तेज़ी से दिल वापस मायूस हो जाता है। मुझे तोड़ने के लिए बस इतना असला ही काफी है। Read more