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चीनी नहीं पीता चाय में आजकल, कुछ यादें घोल लेता हूँ, चाय और सुबह दोनों मीठे हो जाते हैं।

माफ़ी

कविताओं में ही तुमसे माफ़ी मांग लेता हूँ, डरता हूँ, कहीं तुम ये पढ़ तो नहीं रहीं। 

ज़ख्म

ज़ख्म कुछ गहरे हैं, उन्हें कुछ शब्दों से सी लिया करता हूँ। तुम्हे असल में तो पा ना सका, कहानी-कविता में ही जी लिया करता हूँ। 

इश्क

इश्क करना मुश्किल है। लेकिन उससे भी ज्यादा मुश्किल है इश्क मांगना। 

लहरें

ज़माने बाद हम फिर मिलेंगे, उसी दरिया के किनारे।  और लहरें फिर गवाह होंगी, की इश्क सब कुछ हो सकता है, पर काफी नहीं। 

असला

शायद सच ही कहते हैं। कुछ ज्यादा ही कमज़ोर हो गया हूँ मै। तुम्हारे नाम के नीचे वाली हरी बत्ती देख के आज भी धडकने तेज़ हो जाती हैं, और उसके बुझते ही उतनी ही तेज़ी से दिल वापस मायूस हो जाता है। मुझे तोड़ने के लिए बस इतना असला ही काफी है।